Lamhaa
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लम्हा
'लम्हा' वो छूना चाहता था तुम्हे
और क़रीब आना था उसे तुम्हारे
महसूस कराने साँसोंको..
महसूस कराने साँसोंको..
फासलें नजदीकियोंके मिटाने थे उसे
उम्रभर क़ैद करने उस पल को...
उम्रभर क़ैद करने उस पल को...
वो एक ही बूंद में प्यास बुझानी थी उसे
अरमानों की बारिश में भीगने को...
बिना लफ्जों के बहोत कुछ कहना था उसे
छूटी हुई नज़्म लिखने को...
तुमसेही तुम्हारा हिस्सा चुराना था उसे
अधूरापन पूरा करने को...
अधूरापन पूरा करने को...
अपनी साँसों को रोक तुम्हारी साँसों में जीना था उसे
वो पल में तुम्हारा बनने को..
वो पल में तुम्हारा बनने को..
तुम्हारे ही आँखों में उतरना था उसे..
चाहत की गहराई जानने को...
चाहत की गहराई जानने को...
धड़कन तुम्हारी बनना था उसे...
दिल में तुम्हारे ही ठहरने को...
दिल में तुम्हारे ही ठहरने को...
उस समय खुद को पकड़ रखना था उसे
ये हसीन वक्त हाथ से न जाने को..
उसी समय खुदको पकड़ रखना था उसे
एक यादगार 'लम्हा' बनने को.!!
ये हसीन वक्त हाथ से न जाने को..
उसी समय खुदको पकड़ रखना था उसे
एक यादगार 'लम्हा' बनने को.!!
-अवंती

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